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वही पूज्य गुरु है दयानंद मेरा

  असत शम्भु की पूजा जिसने विसारी। बना सच्चे शंकर का जो था पुजारी।। धराधाम सुखसाज पर लात मारी। बना लोकहित पूर्ण जो ब्रह्मचारी।। किया देश सारे को अपना बसेरा। वही पूज्य गुरु है दयानन्द मेरा।। दशा जिसने भारत की बिगड़ी सुधारी। किये एक जिसने सिखा-सूत्रधारी।। धर्मवीर सेवावृती क्रान्तिकारी। बनाए थे जिसने बहुत नर व नारी।। किया जिसने फिर जागृति का सवेरा। वही पूज्य गुरु है दयानन्द मेरा ।। नया पन्थ जिसने न कोई चलाया। पुरातन जो वेदों का सन्देश लाया।। अविद्या का जिसने विकट दुर्ग ढाया। अनार्यों को फिर आर्य जिसने बनाया।। दिया आसरा सज्जनों को घनेरा। वही पूज्य गुरु है दयानन्द मेरा।। प्रथम जिसने नारी जगत को जगाया। अनाथ और विधवा को धीरज बंधाया।। छुआछूत का भूत जिसने भगाया। गऊरक्षा का प्रश्न जिस ने उठाया।। कृपा हाथ जिसने दलित जन पै फेरा। वही पूज्य गुरु है दयानन्द मेरा।। चलाने को फिर वेद शिक्षा प्रणाली। यहां नीव गुरुकुल की जिसने थी डाली।। पुनः आर्य जाति सुसांचे में ढाली। बहा जिसने दी गंगा सद्ज्ञान वाली ।। किया दूर जिसने अविद्या अन्धेरा। वही पूज्या गुरु है दयानन्द मेरा।। बना जो कि भारत के उपवन का माली। हृ...